ईरान-इजरायल युद्ध: नेतन्याहू का बड़ा एलान, क्या ट्रंप की 'Air War' बदलेगी मिडिल ईस्ट का नक्शा?
मिडिल ईस्ट में छिड़ी भीषण जंग के बीच इजरायली पीएम नेतन्याहू ने युद्ध की समयसीमा को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। क्या यह युद्ध वाकई जल्दी खत्म होगा या अमेरिका एक और 'अंतहीन जंग' की ओर बढ़ रहा है? अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के पलटवार और ट्रंप की नई रणनीति की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ पढ़ें।
यरूशलेम/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व (Middle East) की धरती एक बार फिर बारूद की गंध से दहल उठी है। शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर हुए भीषण हवाई हमलों के बाद अब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा बयान सामने आया है।
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि भले ही ईरान के खिलाफ यह सैन्य अभियान (Military Operation) कुछ समय ले सकता है लेकिन यह इराक या अफगानिस्तान की तरह अंतहीन युद्ध (Endless War) नहीं बनेगा।
तेजी से बदल रहे हैं समीकरण
शनिवार को शुरू हुए इस हवाई हमले में ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबरों ने पूरे अरब जगत में खलबली मचा दी है। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और उन अरब देशों पर मिसाइलें दागी हैं जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने (Military Bases) मौजूद हैं।
हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस युद्ध के 4-5 हफ्ते चलने का अनुमान जताया था लेकिन अब युद्ध के व्यापक और अनिश्चितकालीन होने के संकेत मिल रहे हैं।
नेतन्याहू का शांति वाला नजरिया
फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम में बात करते हुए नेतन्याहू ने कहा:
यह त्वरित और निर्णायक (Decisive) हो सकता है। इसमें समय लग सकता है, लेकिन यह सालों तक नहीं खिंचेगा।
नेतन्याहू इस युद्ध को केवल एक सैन्य टकराव नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति (Lasting Peace) के अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की परिस्थितियां अब अमेरिका और इजरायल मिलकर तैयार कर रहे हैं ताकि वहां की जनता खुद अपनी सरकार को उखाड़ फेंके।
ट्रंप की रणनीति में बदलाव?
2024 के चुनाव प्रचार में अमेरिका फर्स्ट का नारा देने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब सीधे हस्तक्षेप की नीति अपना रहे हैं। हालांकि अमेरिकी जनता में इस युद्ध को लेकर भारी असंतोष है। एक ताजा रॉयटर्स सर्वे के मुताबिक केवल 25% अमेरिकी ही ईरान पर इन हमलों का समर्थन कर रहे हैं।
शायद यही कारण है कि ट्रंप ने अब अपने सुर बदलते हुए इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई बताना शुरू कर दिया है।

